Best Seller

5

Kiran UPSC Nibandh Solved Papers 2001 till date (Solved in contemporary perspective) (Hindi Medium) (3337)
Contents
निबंध: एक परिचय
The Year 2001
1. हमने अपने लोकतांत्रिक स्थापना से क्या हासिल किया है?
2, 3, 4, 5, 6 continue
Year 2002
1. आधुनिक तकनीकी शिक्षा और मानवीय मूल्य
2, 3, 4, 5, 6 continue
Year 2003
1. नए साम्राज्यवाद के मुखौटे
2, 3, 4, 5, 6 continue
Year 2004
1.आसियान सहयोग को बढ़ावा देने में भारत की भूमिका
2, 3, 4, 5, 6 continue
Year 2005
1.गरीबों तक न्याय पहुँचना चाहिए
2, 3, 4, 5, 6 continue
Year 2006
1.महिला आरक्षण विधेयक भारत में महिलाओं का सशक्तीकरण करेगा
2, 3, 4, 5, 6 continue
Year 2007
1.स्वतंत्रा सोच को बचपन से ही प्रोत्साहित किया जाना चाहिए
2, 3, 4, 5, 6 continue
Year 2008
1.सुशासन में मीडिया की भूमिका
2, 3, 4, 5, 6 continue
Year 2009
1.क्या हमारे परम्परागत हस्तशिल्पों की नियति में मंथर मृत्यु लिखी है?
2, 3, 4, 5, continue
Year 2010
1.भूगोल यथावत रह सकता है; इतिहास के लिए यह आवश्यक नहीं है
2, 3, 4, continue
Year 2011
1.लघुतर राज्यों का सृजन और परिणामी प्रशासनिक, आर्थिक एवं विकासी निहितार्थ 2, 3, 4, continue
Year 2012
1.गांधीजी के विचारों के संदर्भ में ‘स्वाधीनता, ‘स्वराज्य ’और ‘धर्मराज्य’ शब्दों का क्रम विकासात्मक पैमाने पर अन्वेषण कीजिए। भारतीय लोकतंत्रा पर उनकी समकालीन प्रासंगिकता पर समालोचनात्मक टिप्पणी कीजिए।
2, 3, 4, continue
Year 2013
1.जो बदलाव आप दूसरों में देखना चाहते हैं, पहले स्वयं में लाइए-गांधीजी
2, 3, 4, continue
Year 2014
खण्ड-A
1.अधिकार (सत्ता) बढ़ने के साथ उत्तरदायित्व भी बढ़ जाता है
2, 3, 4, continue
खण्ड-B
1.क्या यह नीति गतिहीनता थी या कि क्रियान्वयन गतिहीनता थी, जिसने हमारे देश
की संवृध्दि को मंथर बना दिया था?
2, 3, 4, continue
Year 2015
खण्ड-A
1.किसी को अनुदान देने से उसके काम में हाथ बँटाना बेहतर है
2.फुर्तीला किंतु संतुलित व्यक्ति ही दौड़ में विजयी होता है
3.किसी संस्था का चरित्रा चित्रण, उसके नेतृत्व में प्रतिबिम्बित होता है
4.मूल्यों से वंचित शिक्षा, जैसी अभी उपयोगी है, व्यक्ति को अध्कि चतुर शैतान बनाने जैसी लगती है
खण्ड-B
1.प्रौद्योगिकी, मानव शक्ति को विस्थापित नहीं कर सकती
2.भारत के सम्मुख संकट - नैतिक या आर्थिक
3.वे सपने जो भारत को सोने न दें
4.क्या पूँजीवाद द्वारा समावेशित विकास हो पाना संभव है?
Year 2016
खण्ड-A
1.स्त्री-पुरुष के समान सरोकारों को शामिल किए बिना विकास संकटग्रस्त है
2.आवश्यकता लोभ की जननी है तथा लोभ का आधिक्य नस्लें बर्बाद करता है
3.संघीय भारत में राज्यों के बीच जल विवाद
4.नवप्रवर्तन, आर्थिक संवृध्दि और सामाजिक कल्याण का अपरिहार्य निर्धरक है
खण्ड-B
1.सहकारी संघवादः मिथक अथवा यथार्थ
2.साइबर स्पेस और इंटरनेटः दीर्घ अवधि में मानव सभ्यता के लिए वरदान या अभिशाप
3.भारत में लगभग रोजगारविहीन संवृध्दि : आर्थिक सुधर की विसंगति या परिणाम
4.डिजिटल अर्थव्यवस्थाः एक समताकारी या आर्थिक विषमता का स्त्रोत
Year 2017
खण्ड-A
1.भारत में अधिकतर कृषकों के लिए कृषि जीवन-निर्वाह का एक सक्षम स्रोत नहीं रही है
2.भारत में संघ और राज्यों के बीच राजकोषीय संबंधें पर नए आर्थिक उपायों का प्रभाव
3.राष्ट्र के भाग्य का स्वरूप-निर्माण उसकी कक्षाओं में होता है
4.क्या गुटनिरपेक्ष आंदोलन (नाम) एक बहुध्रुवी विश्व में अपनी प्रासंगिकता को खो बैठा है?
खण्ड-B
1.हर्ष कृतज्ञता का सरलतम रूप है
2.भारत में ‘नए युग की नारी’ की परिपूर्णता एक मिथक है
3.हम मानवीय नियमों का तो साहसपूर्वक सामना कर सकते हैं, परंतु प्राकृतिक नियमों का प्रतिरोध् नहीं कर सकते
4.‘सोशल मीडिया’ अंतर्निहित रूप से एक स्वार्थपरायण माध्यम है
Year 2018
खण्ड-A
1.जलवायु परिवर्तन के प्रति सुनम्य भारत हेतु वैकल्पिक तकनीकें
2.एक अच्छा जीवन प्रेम से प्रेरित तथा ज्ञान से संचालित होता है
3.कहीं पर भी गरीबी, हर जगह की समृद्धि के लिए खतरा है
4.भारत के सीमा विवादों का प्रबंधन-एक जटिल कार्य
खण्ड-B
1. रूढ़िगत नैतिकता आधुनिक जीवन का मार्गदर्शक नहीं हो सकती है
2. ‘अतीत’ मानवीय चेतना तथा मूल्यों का एक स्थायी आयाम है
3. जो समाज अपने सिद्धातों के ऊपर अपने विशेषाध्किारों को महत्व देता है, वह दोनों से हाथ धे बैठता है
4. यथार्थ आदर्श के अनुरूप नहीं होता, बल्कि उसकी पुष्टि करता है
Year 2019
खण्ड-A
1. विवेक सत्य को खोज निकालता है
2. मूल्य वे नहीं जो मानवता है, बल्कि वे हैं जैसा मानवता को होना चाहिए
3. व्यक्ति के लिए जो सर्वश्रेष्ठ है, वह आवश्यक नहीं कि समाज के लिए भी हो
4. स्वीकारोक्ति का साहस एवं सुधर करने की निष्ठा, सफलता के दो मंत्रा हैं
खण्ड-B
1. दक्षिण एशियाई समाज सत्ता के आसपास नहीं, बल्कि अपनी अनेक संस्कृतियों और विभिन्न पहचानों के ताने-बाने से बने हैं
2. प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा की उपेक्षा भारत के पिछड़ेपन का कारण हैं
3. पक्षपातपूर्ण मीडिया भारत के लोकतंत्रा के समक्ष एक वास्तविक खतरा है
4. कृत्रिम बुद्धि का उत्थानः भविष्य में बेरोजगारी का खतरा अथवा पुनर्कौशल और उच्चकौशल के माध्यम से बेहतर रोजगार सृजन के अवसर
●मॉडल पेपर्स
Year 2020
खण्ड-A
1. मनुष्य होने और मानव बनने के बीच का लम्बा सफ़र ही जीवन है
2. विचारपरक संकल्प स्वयं के शांतचित रहने का उत्प्रेरक है
3. जहाज अपने चारों तरफ के पानी के वजह से नही डूबा करते, जहाज पानी के अन्दर समा जाने के वहज से डूबते है
4. सरलता परम परिष्करण हैं
खण्ड-B
1. जो हम हैं, वह संस्कार, जो हमारे पास है, वह सभ्यता
2. बिना आर्थिक समृद्धि के सामाजिक न्याय नहीं हो सकता, किन्तु बिना सामाजिक न्याय के आर्थिक समृद्धि निरर्थक है
3. पितृसत्ता की व्यवस्था नजर में बहुत कम आने के बावजूद सामाजिक विषमता की सबसे प्रभावी सरंचना है
4. अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्धों में मौन कारक के रूप में प्रौद्योगिकी